:: आत्मा देह के गुणों से लिप्त नहीं होता ::

कौन्तेय! अनादि होने से और गुणातीत होने से यह अविनाशी परमात्मा शरीर में स्थित होते हुए भी वास्तव में न करता है और न लिप्त ही होता है। किस प्रकार?
जिस प्रकार सर्वत्र व्याप्त हुआ आकाश सूक्ष्म होने के कारण लिप्त नहीं होता, ठीक वैसे ही सर्वत्र देह में स्थित हुआ भी आत्मा गुणातीत होने के कारण देह के गुणों से लिप्त नहीं होता।
(गीता – अध्याय १३, श्लोक ३१, ३२)
।। ॐ श्री सद्गुरुदेव भगवान् की जय ।।
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श्रीमद्भगवद्गीता – यथार्थ गीता -अध्याय १३ – त्रयोदश अध्याय – क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग

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