अहिंसा –
संसार के प्रायः हर देश में अहिंसा के उपदेशक रहे हैं, किन्तु भारत में अहिंसा के जितने समर्थक और पालक होते आए हैं उतने संसार के किसी भी देश में नहीं हुए। आत्मा की भांति ही अहिंसा की अवधारणा भी भारतियों की विश्व को महानतम देनों में से एक हैं। इसके मूल में है भारतीय ऋषियों का चिन्तन, जिसकी परम्परा वेद, उपनिषद, महावीर, बुद्ध और गुरुनानक से लेकर अद्यावधि अविच्छन्न हैं।

वस्तुतः अहिंसा का यथार्थ क्या है ? इसका अनर्थ कैसे और किनके द्वारा किया गया ? योग साधना के एक अंग ‘अहिंसा’, पर स्वामी जी का एक बेलाग और सटीक स्पष्टीकरण उन्हीं की वाणी हैं।

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