Amritvani – 01 – अमृतवाणी – नैहर दाग लागल मोरी चुनरी ।। ॐ श्री सद्गुरुदेव भगवान् की जय ।। यथार्थ गीता एवं आश्रम प्रकाशनों की अधिक जानकारी और पढने के लिए www.yatharthgeeta.com पर जाएं । © Shri Paramhans Swami Adgadanandji Ashram Trust. Share: