प्रश्न- ध्वनि क्या है? ध्वनि की शक्ति समझायें।
उत्तर- वायुमण्डल में तरंगों की हलचल को ध्वनि कहा जाता है। तेज ध्वनि, मधुर ध्वनि, उच्चारण में उदात्त, अनुदात्त, स्वरित इत्यादि ध्वनियों के अनेकानेक भेद हैं। बहुत से लोग ध्वनियों के माध्यम से पशु-पक्षियों की पहचान कर लेते हैं। आजकल ध्वनि-प्रदूषण से शहर काँप रहे हैं। निवारण के लिए ध्वनिरोधक लगा रहे हैं, वृक्षारोपण कर रहे हैं; किन्तु अध्यात्म में इन ध्वनियों का कोई उपयोग नहीं है। अध्यात्म में जिस ध्वनि की बहुत बड़ी महिमा है वह भजन की जागृति के साथ है।
भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण के पूर्व आकाशवाणी हुई, ‘‘रे कंस! जिस देवी को तू ले जा रहा है इसका आठवाँ पुत्र तुम्हारा वध करेगा।’’ इस ध्वनि से कुहराम मच गया। जनता भगवान की प्रतीक्षा करने लगी। कंस मौत से बचने की मोर्चाबन्दी करने लगा किन्तु लाखों प्रयास करने पर भी आकाशवाणी सत्य हुई। यह है ध्वनि जो परमात्माप्रदत्त होती है।
वनवासकाल में भगवान श्रीराम चित्रकूट में भार्या सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ पर्णकुटी में निवास कर रहे थे। कोल-भीलों ने लक्ष्मण को बताया कि भरत एक बड़ी सेना लेकर आ रहे हैं। तमतमाये हुए लक्ष्मण श्रीराम के पास आये और कहा– लगता है वह आपको मारकर अपने राज्य को निष्कण्टक बनाने के षड्यन्त्र में आ रहे हैं; किन्तु चिन्ता की कोई बात नहीं है मैं अकेला ही उन सबको मारकर गिरा दूँगा। आपके चरणों की शपथ है, मैं उन्हें जीवित नहीं छोड़ूँगा। राम ने समझाया भी, किन्तु लक्ष्मण का आक्रोश कम नहीं हुआ। तब एक दूसरा प्रबन्ध हो गया, आकाशवाणी हुई–
जगु भय मगन गगन भइ बानी।
लखन बाहुबल बिपुल बखानी।।
(रामचरितमानस, २/२३०/१)
लक्ष्मण! आप नि:सन्देह महान पराक्रमी हैं; किन्तु बिना सोचे-विचारे जल्दबाजी में कार्य कर पछताने वाले को कोई बुद्धिमान नहीं कहता। लक्ष्मण संकुचित हुए, राम ने समझा लिया। यह है ध्वनि!
हमारे गुरु महाराज का पूरा जीवन ही आकाशवाणियों से संचालित था। अध्यात्म के प्रत्येक पथिक का यही पाथेय है। इसके अनेकों माध्यम हैं। जब यह जागृत हो जाती है तो शून्य से, पृथ्वी से, उड़ते पक्षियों से, राह चलते व्यक्ति से, पेड़-पौधों से– सर्वत्र से भगवान बोल सकते हैं। विस्तार से जानने के लिए आश्रमीय प्रकाशन ‘जीवनादर्श एवं आत्मानुभूति’ देखें। इस ध्वनि का नाम है भजन की जागृति। किसी तत्त्वदर्शी महापुरुष के द्वारा यह जागृत होती है। एक बार जागृत हो जाने पर यह ध्वनि सेवक भक्त को सुरक्षा-संरक्षण प्रदान करते हुए, भजन पढ़ाते हुए, प्रकृति के खोह-खन्दकों से बचाते हुए ले चलती है। लक्ष्य परमात्मा को विदित कराकर ही यह शान्त होती है, मार्ग में कहीं कोई विराम नहीं!
सारांशत: आध्यात्मिक परिसर की यह ध्वनि भजन की जागृति है जो भगवान द्वारा तत्त्वदर्शी महापुरुष के सौजन्य से होती है। इसके द्वारा परमात्मा साधक का मार्गदर्शन करते हैं। इस ध्वनि का अमोघ प्रभाव होता है। संसार में उसका मार्ग रोकनेवाला कोई नहीं है, कोई उसे अन्यथा नहीं कर सकता। यही उसकी विशेष शक्ति है।
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(‘नवयुवकों की जिज्ञासाऍं एवं भजन से लाभ’ से उद्धृत)