अलख संग मिलियो…..
संत कबीर के इस भजन की स्पष्ट और सुन्दर व्याख्या करते हुए स्वामी जी बता रहे हैं कि, परमात्मा सबके लिये उपलब्ध है, बस उसकी प्राप्ति की विधि ज्ञात होनी चाहिये। साथ ही श्रद्धा, भक्ति और समर्पण होना आवश्यक है। एक दर्द होना चाहिये, विरह का । चाह होनी चाहिये दीवानगी की सीमा तक । स्वामीजी बता रहे हैं कि संत कबीर वस्तुतः क्या कहना चाह रहे हैं ।

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