अवतार – अजामिल उद्धार

अजामिल उद्धार

यह आत्मा का उद्धार है, जिसे महापुरुषों ने प्रत्येक मानव के लिए उपयोगी एक कथानक का रूप दिया है। कालान्तर में भाषा, रहन-सहन एवं प्रवृत्तियों के परिवर्तित हो जाने से पूर्व कथानक धुँधले, विवाद के विषय बन जाते हैं। इन विषम परिस्थितियों में महापुरुषों को नवीन रूप देकर समझाना पड़ता है, जबकि उद्देश्य एक ही है। अब आपके सामने आत्मकल्याण की युक्ति समझने योग्य एक प्राचीन कथानक है- अजामिल उद्धार। अज-अमल अर्थात् अजर-अमर निर्दोष आत्मा ही अजामिल है। ‘गो’ नाम इन्द्रिय-समुदाय का है, जो सम्पूर्ण वासनाओं का भार वहन करती हैं। ‘खाद्य अखाद्यहि खाई’- जो करने योग्य और न करने योग्य सब करती हैं और अपना-अपना विषय ढूँढ़ती हैं। ये इन्द्रियाँ ही गणिका हैं। ये इन्द्रियाँ दस-ग्यारह भागों में विभक्त हैं लेकिन सब मिलाकर विषय वासना के संग्रह में एक से संचालित हैं। मन ही सबका मूल है और यही भोग करता है। यह अजर-अमर निर्दोष आत्मा इस गणिका (गो) के अधीन है। लवरूपी लड़का हुआ। एक महापुरुष नारद, नाद रंध्र की स्थितिवाले महापुरुष ने उपदेश दिया और उस परम कल्याणमय नारायण के प्रति लगन जागृत हो गयी।

यह इन्द्रिय-समुदाय (गणिका) माया मानव का भार वहन करनेवाली भी विषयों से सिमटकर मन में जो सुरत है इस सुरतिरूपी सुग्गे को ‘नारायण’ पढ़ाने लगती हैं। ये इन्द्रियाँ भी भजन में सहयोग देने लगती हैं। फिर भी इष्ट-प्राप्ति में यदि एक सूत की भी दूरी है, तो गणिका साथ रहकर भी भुलावे में डालती रहती है। दीर्घकालीन अभ्यास के फलस्वरूप मन का मृत्युकाल आ गया और सुरति एवं नारायण शब्द तद्रूप हो गये। इस मन के विलीनीकरण का समय ही मानव की वास्तविक मृत्यु है। मन आपै ही जगत बना के ऊँच नीच तन पाया’– वास्तव में मन ही जगत् का निर्माता है। मन पर विजय प्राप्त किये बिना जगत् से किसी ने छुटकारा नहीं पाया। जब समस्त वासनाओं को भुलाकर मन से सुरत की डोरी नारायण से लग जाती है तब तुरन्त यमराज का बन्धन कट जाता है और जो विश्व का भरण-पोषण करनेवाला परमात्मा है उसके कल्याणकारी सूत्रों में बँधकर कल्याणस्वरूप हो जाता है। विष्णु के दूत का आना और ले जाना यही इंगित करता है। प्रत्येक मानव की यही दशा है जो पल-पल त्राण चाहता है। उसके लिए यह साधन-क्रम में बदलकर सहायक हो जाता है और कल्याण के लिए समयानुकूल, अवस्था के अनुसार उपयोगी एवं पर्याप्त पथ है।

।। ॐ।।

(शंका-समाधानसे उद्धृत)

Q & A
×