प्रश्न – मज़हब सम्प्रदाय धर्म की संज्ञा कैसे पा गये?
उत्तर :- पू्ज्य गुरुदेव (श्री परमानन्दजी महाराज) कहा करते थे, ‘‘गुरु के रियाज पर घमंड करे चेला।’’ संयम तो गुरु महाराज ने किया और स्थिति प्राप्त की; किन्तु शिष्य-वर्ग उतना साधन न कर डींग हाँकने लगते हैं कि हमारे गुरु ने यह किया, वह किया। हमारे गुरु महाराज ऐसे थे। वे स्वयं की ओर नहीं देखते कि वे क्या हैं? अकारण अतिशयोक्ति से जीने-खाने की व्यवस्था मिल सकती है, इससे अधिक कुछ नहीं मिलता। महापुरुष समाज में कभी भी दरार नहीं डालता, यदि डालता है तो अभी वह भटका हुआ पथिक है। महापुरुष के स्थान पर जब कोई अयोग्य गद्दी पर आ जाता है तो मज़हब, सम्प्रदाय, परस्पर विरोधी आचार-विचारों का सृजन होने लगता है।
(‘प्रश्न समाज के – उत्तर गीता से’ से उद्धृत) * * *