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अवतार – अजामिल उद्धार

अजामिल उद्धार यह आत्मा का उद्धार है, जिसे महापुरुषों ने प्रत्येक मानव के लिए उपयोगी एक कथानक का रूप दिया है। कालान्तर में भाषा, रहन-सहन एवं प्रवृत्तियों के परिवर्तित हो…

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अवतरण-विधि

अवतरण-विधि प्रश्न- महाराजजी! आपने बताया कि अवतार किसी योगी के हृदय में ही होता है; किन्तु मानस में पृथ्वी ब्रह्मा के पास गयी तब भगवान का अवतार हुआ। कृपया मानस…

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अर्जुन गुरुजनों को न मारकर किस भिक्षान्न की कामना करता है?

भिक्षा प्रश्न- महाराजजी! गीता के दूसरे अध्याय में अर्जुन गुरुजनों को न मारकर इस लोक में भिक्षा का अन्न भोगना भी श्रेयतर मानता है। कृपया बतलावें वह भिक्षा कैसी है?…

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अमृत कुम्भ

अमृत कुम्भ पूर्वकाल में देवासुर संग्राम हुआ था। असुर वास्तव में विजेता हो गये। देवताओं को अपनी देवपुरी, इन्द्रपुरी छोड़कर भागना पड़ा। वे मारे-मारे फिर रहे थे। भगवान की शरण…

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अमृत का प्रभाव

प्रश्न- महाराजजी! अमृत का प्रभाव है कि जिसके ऊपर पड़ जाय, जिला दे किन्तु युद्ध की समाप्ति में अमृत-वर्षा से बानर-भालू तो जी उठे लेकिन निशाचरों पर उसका कुछ भी…

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अधम कौन है ? – कर्म क्या है ? – यज्ञ क्या है ?

प्रश्न - अधम कौन है? कर्म क्या है? यज्ञ क्या है? उत्तर :- योग-विधि यज्ञ है। उस विधि को क्रियान्वित करना कर्म है। यज्ञ के द्वारा देवताओं की उन्नति करो,…

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अजर, अमर और शाश्वत आत्मा का हित कैसा ?

प्रश्न- महाराजजी! अजर, अमर और शाश्वत आत्मा का हित कैसा? उत्तर- विद्वत् समूह को सम्बोधित करते हुए महाराजजी कहते हैं कि जिस गीता में आत्मा को अजर, अमर और शाश्वत…

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