भगवान बुद्ध की दृष्टि में ‘अहिंसा’
अहिंसा यौगिक शब्द है। जब साधक शान्त-एकान्त में भजन-चिन्तन में बैठते हैं, उनके अन्त:करण में आनेवाली एक अवस्था का नाम अहिंसा है। यह…
गीता के आलोक में ‘अहिंसा’
सृष्टि के आदिज्ञान का लिपिबद्ध रूप भगवान श्रीकृष्णोक्त गीता है इसलिये आदिशास्त्र श्रीमद्भगवद्गीता है। भगवान ने श्रीमुख से इसे शास्त्र घोषित किया- ‘इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं…
प्रश्न- एक बार एक वृद्ध सज्जन विनीत शब्दावली में अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए प्रार्थना करते हैं कि- महाराजजी! जीवन पर विचार करने से सर्वाधिक पाप ही दिखाई पड़ता है।…
अवतार
प्रश्न- महाराजजी! ‘बिप्र धेनु सुर सन्त हित लीन्ह मनुज अवतार।’ (मानस, 1/192) सन्त तो विरले होते हैं। सामान्य मनुष्यों में अवतार केवल ब्राह्मण के लिए होता है। क्या और…
श्रीकृष्ण के शब्दों में ‘अवतार’
अर्जुन द्वारा इस प्रकार प्रष्न किये जाने पर कि ‘अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः’ (गीता, ४/४) अर्थात् हे श्रीकृष्ण! आपका जन्म तो अब हुआ…
वराह अवतार
हिरण्याक्ष - प्राचीन वैदिक भाषा में हिरण्य कहते हैं सूक्ष्म शरीर को। ब्रह्मा से लेकर यावन्मात्र जगत् हिरण्यगर्भ कहलाता है। इसमें जन्म-जन्मान्तरों के संस्कारों की ‘रील’ है, जो…
मत्स्यावतार
कथा-कहानी के माध्यम से जीव-जगत् के नाना सत्यों, रहस्यों एवं सिद्धान्तों को उद्घाटित करने की अति प्राचीन परम्परा है। सामान्य से लेकर बड़ी-बड़ी बातों तक को कथानकों का आधार…
नरसिंह अवतार
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन।। (गीता, ४/९)
अर्जुन! मेरा जन्म, कर्म अलौकिक है। लौकिक का मतलब पिण्डरूप में आना-…
अवतार का अनन्त विधान एवं अधिकारी के लिए सम्भव
अवतार योगी के अन्तस्थल में ही होता है। देश, जाति एवं काल-विशेष में प्रभु के अवतरण की परिकल्पना भ्रान्तिमात्र है। प्रक्रिया-विशेष…
कच्छपावतार : सागर-मन्थन
दोहा - भव सागर मन्थन करि, रतन कह्यो सब देख।
तेरह बिष की बेलि हैं, अमिय पदारथ एक।।१।।
भावार्थ - चिन्तन की भावधारा में, एक समय की…