‘गो’ प्रकरण
प्रश्न- महाराजजी! आप कहते हैं कि अवतार योगी के लिए है, किन्तु ‘मानस’ में तो गाय के लिए अवतार हुआ। गाय के शरीर में देवताओं का निवास है।…
प्रश्न- प्रायः लोग आपसे प्रश्न किया करें कि, ‘महाराजजी! क्या गाँजा पीने से ध्यान में मदद मिलती है?’
उत्तर- आप हँसते हुए उत्तर दें कि गाँजा तो मैं भी पीता…
प्रश्न- महाराजजी! क्या अध्यात्म में युद्ध अनिवार्य है?
उत्तर- अध्यात्म ही एक ऐसा स्थल है जहाँ युद्ध अनिवार्य है, अन्यत्र कहीं नहीं। संसार में बड़े-बड़े संघर्ष होते हैं परन्तु इनका…
प्रश्न- महाराजजी! कामधेनु एवं कल्पवृक्ष की क्या मान्यता है? अब तक तो हमलोग इन्हें पशु एवं वृक्ष ही मानते आये हैं।
उत्तर- प्राचीन शास्त्रों में ‘गो’ शब्द की महिमा विलक्षण…
प्रश्न- भाविकों द्वारा प्रार्थना सहित यह प्रश्न किया गया कि, महाराजजी! हमारे कल्याण का कोई सरल उपाय बताने की दया की जाय?
उत्तर- इस पर पूज्य महाराजजी उनके प्रति अति…
युग-धर्म
प्रश्न- अब तो कलियुग आ गया महाराज! अब धरम-करम कैसे होगा?
उत्तर- देखिये, रामचरित मानस में कलियुग-महिमा-गायन का प्रसंग जहाँ-जहाँ आया है उस पर दृष्टिपात करने से ज्ञात होता…
कर्मकाण्ड
कर्मकाण्ड पोंगापंथी नहीं, मानव-जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। इसे जन-जन के हृदय में पहुँचाना पुरोहितजनों का उद्देश्य है। - स्वामी अड़गड़ानन्द
मनुष्य के जीवन में घटनेवाली हर घटना एक…
एकलव्य का अँगूठा
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अभी-अभी आश्रम से प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या ‘यथार्थ गीता’ के आडियो कैसेट का लोकार्पण किया है। उसी सन्दर्भ में पत्रकारों से मिलने का…
एक बार हरि घोड़ा भये
(गुरु महाराज जब विचरण काल में मधवापुर थे) झाड़ियों के पार उधर मधवापुर गाँव था। लड़के स्कूल जायें तो उनकी निगाह पड़ गयी। एक ने…
प्रश्न- आश्रम घोर जंगल में है, कोई रास्ता भी नहीं है। अतः दस बजे के पूर्व किसी भी यात्री का पहुँचना असम्भव है। एक बार कुछ सशस्त्र दर्शनार्थियों ने बहुत…