श्रीमद्भगवद्गीता की सर्वगाह्य टीका का औचित्य
(गीता जयन्ती के पावन पर्व पर ११ दिसम्बर, सन् २००५ को पूज्य सन्तों की सभा में महाराजश्री का सन्देश)
पाँच सहस्र से अधिक लम्बे…
श्रीकृष्ण-परिचय
महायोगेश्वर श्रीकृष्ण भी इसी स्थिति से संयुक्त एक महापुरुष हैं। उन्होंने स्वयं अपना परिचय योगामृत प्रसारिणी वाणी ‘गीता’ शास्त्र में दिया है, जिसका तात्पर्य है कि श्रीकृष्ण एक योगप्रदाता…
कर्म
प्रश्न- महाराजजी! श्रीकृष्ण ने गीता में स्थान-स्थान पर कर्म करने पर बहुत बल दिया है। वह कर्म क्या है?
उत्तर- देखिये, प्रत्येक महापुरुष की दृष्टि में कर्म का शुद्ध…
श्रीकृष्ण एक योगी थे
प्रश्न- महाराजजी! कुछ लोग कहते हैं कि रास रचानेवाले श्रीकृष्ण और गीता के उपदेशक श्रीकृष्ण भिन्न-भिन्न थे। दोनों एक हो नहीं सकते। कुछ लोग कहते हैं,…
शूर्पणखा-विरूपण
कतिपय लोगों का आक्षेप है कि जिनके भाई लक्ष्मण ने शूर्पणखा, एक नारी का नाक-कान काट डाला, उन्हें हम अपना आराध्य नहीं मान सकते। इस प्रकरण में भी सर्वप्रथम…
प्रश्न- शिव शंभु मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?
उत्तर- भगवान के बहुत से नाम हैं। वह कैलाश पर्वत पर निवास करते थे इसलिए कैलाशपति कहलाये। शिव अर्थात् कल्याणस्वरूप। ‘शं करोति…
शिक्षा और विद्या
प्रश्न- महाराजजी! आजकल बहुत से पढ़े-लिखे बेकार भटक रहे हैं, उनको नौकरी नहीं मिलती। लगता है कि विद्या अनावश्यक है। विद्यालयों में बच्चों का समय अकारण क्यों…
शम्बूक
विश्व को एकता दी तो भारत ने। सर्वप्रथम वैदिक महर्षियों ने उद्घोष किया, ‘शृण्वन्तु विश्वेऽमृतस्य पुत्राः’- हे सम्पूर्ण विश्व के मानव! तुम अविनाशी के पुत्र हो। एकता का यह…
वेदों के नाम पर.....
ऋचो अक्षरे परमे व्योमन् यस्मिन् देवा अधिविश्वे निषेदुः।
यस्तन्ना वेद किमृचा करिष्यति य इत्तद् विदुस्त इमे समासते।। (ऋग्वेद, १/१६४/३९)
सभी ऋचाएँ परम अविनाशी अक्षर में स्थित…
वेदान्त
प्रश्न- महाराजजी! भारतीय मनीषियों ने वेदान्त की बड़ी महिमा बतायी है। कृपया स्पष्ट किया जाय कि वेदान्त क्या है?
उत्तर - परमात्मा के शोध की विधि का परिणाम वेदान्त…