All Q/A

सरस्वती पूजन

सरस्वती पूजन (दिनांक २२ जनवरी, १९९९ को पिलिग्रिम्स बुक हाउस, वाराणसी के उद्घाटन समारोह में पूज्य महाराज जी द्वारा सरस्वती पूजन के औचित्य की समीक्षा।) बन्धुओ! आज बसन्त पंचमी है।…

Read more

समुद्र के जलचर समुद्र से भी बड़े एवं असंख्य थे तो वे रुके कहाँ?

प्रश्न- महाराजजी! समुद्र के जलचर समुद्र से भी बड़े एवं असंख्य थे तो वे रुके कहाँ? सतयोजन समुद्र के बराबर एक-एक जलचर का शरीर था और कुछ तो इतने बड़े…

Read more

सन्तों का उद्भव एवं उनकी परम्परा

सन्तों का उद्भव एवं उनकी परम्परा परमपूज्य परमहंसजी का जीवन पूरा का पूरा उन महापुरुषों से मिलता है, जो आदि से लेकर आज तक होते आये हैं; जैसे- राम, कृष्ण,…

Read more

सनातन-धर्म

सनातन-धर्म धर्म के लिए झगड़े व्यर्थ हैं। विश्वभर में धर्म एक है, यदि दो है तो धोखा है। जिसमें सत्य नहीं, वह धर्म नहीं। धर्म में सचाई नहीं है तो…

Read more

सनातन-धर्म है क्या?

प्रश्न- महाराजजी! प्रबल पिपासु होने पर भी बहुत-सी भ्रान्तियों में बहता रहता हूँ। वस्तुतः सनातन-धर्म है क्या? कोई ऐसा रूप बताइये जिसका सभी पालन कर सकें? उत्तर- जिसे तुम भ्रान्ति…

Read more

सनातन-धर्म (हिन्दू-धर्म) क्या?

सनातन-धर्म (हिन्दू-धर्म) प्रश्न- महाराजजी! आजकल हिन्दू-धर्म में अनेक रूढ़ियाँ, अनेक सम्प्रदाय प्रचलित हैं। सभी अपने को सनातनधर्मी कहते हैं। कृपया बताया जाय कि सनातन धर्म क्या है? उत्तर- धर्म में…

Read more

सत्य क्या है और नश्वर क्या है?

प्रश्न - सत्य क्या है और नश्वर क्या है? उत्तर :- गीता के अध्याय दो में अर्जुन ने प्रश्न रखा, ‘‘गोविन्द! कुलधर्म सनातन है, कुलधर्म शाश्वत है, जातिधर्म ही सत्य…

Read more

सती

सती उस परम पुरुष परमात्मा से, शाश्वत सत्य से जिसका स्वभाव जुड़ा है वह सती है। जो सत्य-परायण है, उसे सती कहते हैं। ‘सती’ यह शब्द स्त्रीलिंगीय है इसलिए कालान्तर…

Read more

सगुण एवं निर्गुण उपासना में अन्तर

प्रश्न- महाराजजी! सगुण एवं निर्गुण उपासना में क्या अन्तर है? ऐसी धारणा है कि तुलसी व मीरा इत्यादि सगुण उपासक थे और कबीर व जायसी इत्यादि निर्गुण, जबकि अभी आपके…

Read more

श्रीरामचरित मानस में ‘अहिंसा’

श्रीरामचरित मानस में ‘अहिंसा’ भगवान शिव द्वारा विरचित, संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा भाषाबद्ध, जन-जन की जिह्वा पर विराजमान लोकविश्रुत अमरकृति श्रीरामचरित मानस में अहिंसा का स्पष्टीकरण उत्तरकाण्ड में है-…

Read more

Q & A
×