सेवा
आज का प्रश्न है सेवा! सेवा हम किसकी करें और कैसे करें?
साधु वहीं जो सेवा जीते, सेवा सदगुरु पावै।
कहत कबीर सुनो भाई संतो, जो वह गुफा लखावै।।…
शिव तत्त्व
प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।
जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर।
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भजन किसका, कैसे और क्यों?
मनुष्य देह की सराहना देवता और सन्तों ने की है। केवल एक प्रयोजन के लिए– ‘सो सनेह सिय पी के’ (विनयपत्रिका, पद १७५/२)- वह परमात्मा…
पिण्डदान
।। बोलिये श्री सद्गुरुदेव भगवान की जय।।
आज आपमें से किसी ने पूछा है कि पिण्डदान उचित है या अनुचित? आजकल पितृपक्ष चल रहा है। हमें यह देखना है…
दीन कौन?
एक परमात्मा की शरण छोड़कर, उबक-तुबक कर कितना भी इकट्ठा कर लो आखिर दीन का दीन! किले ध्वस्त हो गये, चतुरंगिणी सेना चली गई... क्या किसी को उम्मीद…
गुरुमन्त्र
मंत्र एक उलझा हुआ प्रश्न है। मंत्र के नाम पर लोग कान में कुछ शब्द कहते हैं और फिर कहा जाता है कि इसे किसी से बताना मत, यह…
गुरुपूर्णिमा
गुरुपूर्णिमा साल भर में एक बार आती है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा कहते हैं। यह गुरु और शिष्य के मध्य बहुत ही पावन पर्व है। गुरु महाराज…
आरती का अर्थ
अनन्तश्री विभूषित, योगिराज, युगपितामह परमपूज्य श्री स्वामी परमानन्दजी महाराज (परमहंस जी) की आरती का अर्थ
यह सद्गुरुदेव की आरती है। भगवान की आरती तो सबने…
हृदय
दिनांक 5 जून, सन् 2009 को श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ की सायंकालीन सभा में भक्तों की जिज्ञासा कि ‘शरीर का वह कौन-सा अंग है जिसे हृदय कहते हैं, जिस…
हिन्दुत्व क्या है?
महोदय,
हिन्दू रिसर्च फाउण्डेशन, मुंबई ने हिन्दू, हिन्दुत्व तथा हिन्दुस्तान जैसे शब्दों की आधुनिक सन्दर्भ में प्रासंगिकता के परिप्रेक्ष्य में लिखा है। उनका आशय है कि सम्प्रति…