All Q/A

चोलिया काहे न धुलाई

चोलिया काहे न धुलाई चोलिया काहे न धुलाई सुन्दर बाँके जोगिया। जनम जनम की मैली चोली, विषय दाग परि आई। बिन धोये पिया रीझत नाहीं, जनम अकारथ जाई।। चोलिया…

Read more

चदरिया झीनी झीनी बीनी

चदरिया झीनी झीनी बीनी चदरिया झीनी झीनी बीनी राम नाम रस भीनी......चदरिया..........।। काहे कै ताना काहे कै भरनी कौन तार से बीनी........चदरिया..........।। इंगला पिंगला ताना भरनी सुषमन तार से बीनी.....चदरिया..........।।…

Read more

घूँघट के पट खोल री

घूँघट के पट खोल री सन्त कबीर का यह भजन है– ‘घूँघट के पट खोल री, तोहें पिया मिलेंगे।’ जिन्हें प्राप्त करने के बाद इस जीवात्मा की प्यास सदा-सदा के…

Read more

गुरु ने पठाया चेला न्यामत लाना

गुरु ने पठाया चेला न्यामत लाना गुरु ने पठाया चेला न्यामत लाना। पहली न्यामत पानी लाना, कुआँ बावली के पास न जाना, नदिया नाला छाँड़ि के चेला, तुम्बा भर के…

Read more

गाँठ पड़ी पिया बोले न हमसे

गाँठ पड़ी पिया बोले न हमसे गाँठ पड़ी पिया बोले न हमसे! निसिदिन जागूँ मैं पिया तोरी सेजिया, नैन अलसाने निकसि गये घर से। गाँठि पड़ि........ जो मैं जनतिउँ पिया…

Read more

गयी झुलनी टूट

गयी झुलनी टूट गयी झुलनी टूट। दगा होइगा बालम, गयी झुलनी टूट। पाँच रतन की मेरी झुलनिया, बिचवा में ठगवे ले गइले लूट। दगा होइगा......। ऐसी झुलनियाँ बहुरि न बनिहैं,…

Read more

गइया एक बिरंचि दियो है

गइया एक बिरंचि दियो है ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं      द्वन्द्वातीतं गगन सदृशं तत्त्वमस्यादि लक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधी साक्षिभूतं      भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि।। (गुरुगीता, १११) आज हमलोग…

Read more

क्या नयना झमकावै

क्या नयना झमकावै क्या नयना झमकावै, ठगिनिया क्या नैना झमकावै। कबिरा तेरे हाथ न आवै, ठगिनिया क्या नैना झमकावै।। रूपा पहिरि के रूप दिखावै, सोना पहिरि चमकावै। गले डारि तुलसी…

Read more

Q & A
×