छाओ छाओ हो फकीर गगन में कुटी
सन्त कबीर का यह भजन परमपूज्य गुरुदेव भगवान के कर्णकुहरों में उस समय पड़ा जब भगवान के निर्देशों के अनुपालन में आप भजन…
चोलिया काहे न धुलाई
चोलिया काहे न धुलाई सुन्दर बाँके जोगिया।
जनम जनम की मैली चोली, विषय दाग परि आई।
बिन धोये पिया रीझत नाहीं, जनम अकारथ जाई।।
चोलिया…
चुनर में दाग कहाँ से लागल
चुनर में दाग कहाँ से लागल।
यह चुनरी मोरी रंग महल की, बड़े जतन से राखल।
दुइ दुइ सिपहिया द्वारे पै ठाढ़े, सास ननदिया…
चदरिया झीनी झीनी बीनी
चदरिया झीनी झीनी बीनी
राम नाम रस भीनी......चदरिया..........।।
काहे कै ताना काहे कै भरनी
कौन तार से बीनी........चदरिया..........।।
इंगला पिंगला ताना भरनी
सुषमन तार से बीनी.....चदरिया..........।।…
घूँघट के पट खोल री
सन्त कबीर का यह भजन है– ‘घूँघट के पट खोल री, तोहें पिया मिलेंगे।’ जिन्हें प्राप्त करने के बाद इस जीवात्मा की प्यास सदा-सदा के…
गुरु ने पठाया चेला न्यामत लाना
गुरु ने पठाया चेला न्यामत लाना।
पहली न्यामत पानी लाना, कुआँ बावली के पास न जाना,
नदिया नाला छाँड़ि के चेला, तुम्बा भर के…
गाँठ पड़ी पिया बोले न हमसे
गाँठ पड़ी पिया बोले न हमसे!
निसिदिन जागूँ मैं पिया तोरी सेजिया,
नैन अलसाने निकसि गये घर से।
गाँठि पड़ि........
जो मैं जनतिउँ पिया…
गयी झुलनी टूट
गयी झुलनी टूट।
दगा होइगा बालम, गयी झुलनी टूट।
पाँच रतन की मेरी झुलनिया,
बिचवा में ठगवे ले गइले लूट।
दगा होइगा......।
ऐसी झुलनियाँ बहुरि न बनिहैं,…
गइया एक बिरंचि दियो है
ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं
द्वन्द्वातीतं गगन सदृशं तत्त्वमस्यादि लक्ष्यम्।
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधी साक्षिभूतं
भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि।। (गुरुगीता, १११)
आज हमलोग…
क्या नयना झमकावै
क्या नयना झमकावै, ठगिनिया क्या नैना झमकावै।
कबिरा तेरे हाथ न आवै, ठगिनिया क्या नैना झमकावै।।
रूपा पहिरि के रूप दिखावै, सोना पहिरि चमकावै।
गले डारि तुलसी…