‘मानस’ में नारी का स्वरूप
प्रश्न- महाराजजी! गोस्वामी तुलसीदासजी ने ‘रामचरित मानस’ में स्त्रियों को अत्यन्त हेय दृष्टि से देखा है। प्रतीत होता है कि मानस में उन्होंने पुरुष के…
प्रश्न- महाराजजी ! आपकी वाणी सुनने से ऐसा प्रतीत होता है कि रामचरित मानस सबके अन्दर की वस्तु है। इसको समझने की कोई दिशा बतायें।
उत्तर- प्रत्येक मानव बाहर खड़ा…
प्रश्न- मानव जीवन-शैली में आध्यात्मिकता की क्या भूमिका है?
उत्तर- सच पूछिये तो आध्यात्मिकता का कोर्स मनुष्य के लिए ही है। विनयपत्रिका में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है–
जो…
महावीर स्वामी की दृष्टि में ‘अहिंसा’
जन-जीवन में अहिंसा के नाम पर जितना अतिवादी तथा भ्रामक प्रयोग भारत में है, विश्व में अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। यहाँ जीव-हत्या…
महाराजजी की विद्या
अनुसुइया में मेरे आने के दो दिन पश्चात् ही ब्रह्मचारीजी के साथ चित्रकूट जाने का अवसर प्राप्त हुआ। महाराजजी ने उनसे कहा, ‘‘इसे भी लेता जा, मार्ग…
महाभारत युद्ध की ऐतिहासिकता और अध्यात्म
भारतीय मनीषियों ने शास्त्र को सदैव दो दृष्टियों से लिखा है– एक इतिहास को कायम रखना जिससे लोग पूर्वजों के पदचिह्नों पर चलते हुए…
महाभारत के आलोक में ‘अहिंसा’
अहिंसाव्रती पाण्डव-
महाभारत, वनपर्व के स्वप्नोद्भव पर्व में है कि वनवासकाल में वन्य जीव-जन्तुओं को मारना ही पाण्डवों का प्रधान शौक था। एक दिन…
महाभारत की ऐतिहासिकता
महोदय,
आपके सौजन्य से श्री माधव जी गोविन्द जी वैद्य का ‘यथार्थ गीता’ विषयक वैदुष्यपूर्ण पत्र जो आपको ६-२-०६ को लिखा था, पढ़ा। प्रस्तावना, प्रथम तीन अध्याय…
गीता पर उपदेश देते हुए परमार्थ पथिकों के बीच श्री परमहंसजी
महाभारत का प्राण गीता और उसका क्षेत्र
महाभारत का युद्ध अत्यन्त मार्मिक एवं जनसमूह के लिए एक आदर्श है;…
महापुरुष
योगी अवतार का प्रवेश है एवं मात्र योगी ही अवतार-विशेष का प्राकट्य तथा प्रशस्ति का मूल माध्यम होता है। अधिकारी के लिए परमात्मा से निःसृत अलौकिक अवतरण का आरम्भ…