प्रश्न - मनुष्य की उत्पत्ति कैसे हुई?
उत्तर :- गीता मानव का आदि धर्मशास्त्र है। कल्प के आदि में, सृष्टि के आरम्भ में इसका प्रादुर्भाव हुआ है। यह परमात्मा…
प्रश्न - मज़हब सम्प्रदाय धर्म की संज्ञा कैसे पा गये?
उत्तर :- पू्ज्य गुरुदेव (श्री परमानन्दजी महाराज) कहा करते थे, ‘‘गुरु के रियाज पर घमंड करे चेला।’’ संयम तो गुरु…
प्रश्न- मंत्रजप के लिए श्रद्धा या विश्वास का क्या प्रयोजन है?
उत्तर- श्रद्धा के बिना तो कुछ होता ही नहीं और इसका सार्थक प्रयोग मंत्रजप में है, सृष्टि में अन्यत्र…
प्रश्न - मंत्र क्या है?
उत्तर - मंत्र परमात्मा का नाम है, वाचक है, सम्बोधन है, नाम-जप से मिलनेवाली स्थिति है। परमात्मा का बोध करानेवाले किसी दो-ढाई अक्षर के नाम…
प्रश्न - पूरा विश्व भारत की आध्यात्मिक विद्या का ऋणी है। भारत विश्वगुरु है तो उसका शास्त्र क्या है?
उत्तर :- श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य मात्र का धर्मशास्त्र है। सौभाग्य से इसका…
प्रश्न- महाराजजी! भजन की पराकाष्ठा क्या है?
उत्तर- ‘यथा नाम तथा गुण’। भजन का अर्थ होता है- भज न। तात्पर्य यह हुआ कि भागो मत। चिन्तन में वृत्ति का अचल…
भजन किसका करें?
(महाकुम्भ के अवसर पर चण्डीद्वीप, हरिद्वार में दिनांक १०-०४-१९८६ ई० की जनसभा में स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज का प्रवचन।)
बन्धुओ!
सागर-मन्थन के परिणाम में निकले अमृत-घट…
भगवान् श्रीराम का इतिहास
(ब्रह्मलीन स्वामी श्री विमलानन्द आश्रम, विजयपुर, मिर्जापुर के वार्षिक समारोह में स्वामी श्री अड़गड़ानन्दजी महाराज द्वारा दिनांक २८-१२-१९९८ को उलझे प्रश्न का रहस्योद्घाटन।)
बन्धुओ!
आपकी ओर…
भगवान् को दाढ़ी क्यों नहीं?
(एक जिज्ञासु भाविक ने प्रश्न किया है कि भगवान् को दाढ़ी क्यों नहीं है?)
बन्धुओ!
आपकी जिज्ञासा स्वाभाविक है कि भगवान् है कैसा? इसी तरह…
भगवान् कर्ता है अथवा अकर्ता?
प्रश्न - भगवन्! गीता के अनुसार, ‘निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्’- मनुष्य तो निमित्त मात्र है, फिर उसे दोषी क्यों ठहराया जाता है? मोटर एक्सीडेण्ट होने पर…