शब्द सो प्रीति करै सोई पावै
सन्त कबीर का एक भजन है– ‘शब्द सो प्रीति करै सोई पावै।’ परमात्मा को, ईश्वर को, उस शाश्वत धाम को वही प्राप्त कर पायेगा…
वा घर की कोई सुध न बतावे
वा घर की कोई सुध ना बतावे, जा घर से जीव आया है।
तत पर शून्य शून्य पर तत है, ता ऊपर मठ…
राम कहत चलु भाई रे
सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा।
जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा।। (रामचरितमानस, ७/९५/२)
बोलो श्रीराम जय राम जय जय राम।
तीर्थाटन साधन समुदाई।
जोग बिराग ग्यान…
रस गगन गुफा में अजर झरै
रस गगन गुफा में अजर झरै।
बिनु बाजा झनकार उठै जहँ समुझि परै जब ध्यान धरे।।
रस गगन.....
बिना ताल जहँ कँवल फुलाने, तेहि…
मोरे सैंया निकसि गये मैं ना लड़ी
वर्षों पूर्व की घटना है। हम मुम्बई हवाई अड्डे के प्रतीक्षालय में बैठे थे। साफ-सुथरी जगह पर ठीक सामने, जहाँ सबकी दृष्टि पड़…
मय पीकर जे बउराइ गवा
संसार में जब भी किसी ने परमात्मा को पाया है, भजन के नशे से गुजरकर ही पाया है। सन्त इकबाल इत्यादि इसी स्तर के महापुरुष…
मन मस्त हुआ तो क्यों डोले।
मन मस्त हुआ तो क्यों डोले।।
हीरा पाया धरि गठियाया, बार-बार फिर क्यों खोले।
मन मस्त हुआ तो क्यों डोले।।
हंसा पाया मानसरोवर, ताल…
बूझो बूझो पण्डित अमरित बानी।
बूझो बूझो पण्डित अमरित बानी।।
बरसै कम्बल भीजे पानी।।
लौकी बूड़े सिल उतराय। मछली धरि के बकुलवै खाय।।
धरती बरसे सुरुज नहाय। ओरिया क पानी…
बिरहिनी मंदिर दियना बार
(प्रस्तुत पद के रचयिता यारी साहब का मूल नाम यार मुहम्मद था। यह बावरी साहिबा के शिष्य बीरू साहब के शिष्य थे। इनका जीवनकाल सन् १६६८…
बहुरि न अइहैं कोऊ शूरों के मैदान में
एक साधक का समर्पण कैसा होना चाहिए? सब भजन ही तो करते हैं, सब शरण ही तो आते हैं। सद्गुरु की शरण…